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सहीह मुस्लिम

नंबर 4261

नंबर 4261किताब 27, नंबर 8अरबी नंबरिंग 1647.02
وَحَدَّثَنِي سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، كِلاَهُمَا عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَحَدِيثُ مَعْمَرٍ مِثْلُ حَدِيثِ يُونُسَ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ فَلْيَتَصَدَّقْ بِشَىْءٍ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ الأَوْزَاعِيِّ ‏"‏ مَنْ حَلَفَ بِاللاَّتِ وَالْعُزَّى ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو الْحُسَيْنِ مُسْلِمٌ هَذَا الْحَرْفُ - يَعْنِي قَوْلَهُ تَعَالَ أُقَامِرْكَ ‏.‏ فَلْيَتَصَدَّقْ - لاَ يَرْوِيهِ أَحَدٌ غَيْرُ الزُّهْرِيِّ قَالَ وَلِلزُّهْرِيِّ نَحْوٌ مِنْ تِسْعِينَ حَدِيثًا يَرْوِيهِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لاَ يُشَارِكُهُ فِيهِ أَحَدٌ بِأَسَانِيدَ جِيَادٍ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Zuhri

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।