सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4250

नंबर 4250किताब 26, नंबर 16अरबी नंबरिंग 1644.01
وَحَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ يَحْيَى بْنِ صَالِحٍ الْمِصْرِيُّ، حَدَّثَنَا الْمُفَضَّلُ، - يَعْنِي ابْنَ فَضَالَةَ - حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ أَبِي الْخَيْرِ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، أَنَّهُ قَالَ نَذَرَتْ أُخْتِي أَنْ تَمْشِيَ، إِلَى بَيْتِ اللَّهِ حَافِيَةً فَأَمَرَتْنِي أَنْ أَسْتَفْتِيَ لَهَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاسْتَفْتَيْتُهُ فَقَالَ ‏ "‏ لِتَمْشِ وَلْتَرْكَبْ ‏"‏ ‏.‏
Uqba b. Amir reported:My sister took a vow that she would walk bare foot to the house of Allah (Ka'ba). She asked me to inquire from Allah's Messenger (ﷺ) about it. I sought his decision and he said: She should walk on foot and ride also

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।