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सहीह मुस्लिम

नंबर 4235

नंबर 4235किताब 26, नंबर 1अरबी नंबरिंग 1638.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رُمْحِ بْنِ الْمُهَاجِرِ، قَالاَ أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ، عَبَّاسٍ أَنَّهُ قَالَ اسْتَفْتَى سَعْدُ بْنُ عُبَادَةَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي نَذْرٍ كَانَ عَلَى أُمِّهِ تُوُفِّيَتْ قَبْلَ أَنْ تَقْضِيَهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فَاقْضِهِ عَنْهَا‏"‏ ‏.‏
Ibn Abbas reported that Sa'd b. Ubida asked Allah's Messenger (ﷺ) for a decision about a vow taken by his mother who had died before fulfilling it. Allah's Messenger (ﷺ) said:Fulfil it on her behalf

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।