सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4204

नंबर 4204किताब 25, नंबर 1अरबी नंबरिंग 1627.01
حَدَّثَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ، زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى الْعَنَزِيُّ - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ الْمُثَنَّى - قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، - وَهُوَ ابْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ - عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ، عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا حَقُّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ لَهُ شَىْءٌ يُرِيدُ أَنْ يُوصِيَ فِيهِ يَبِيتُ لَيْلَتَيْنِ إِلاَّ وَوَصِيَّتُهُ مَكْتُوبَةٌ عِنْدَهُ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Umar (Allah be pleased with them) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:It is the duty of a Muslim who has something which is to be given as a bequest not to have it for two nights without having his will written down regarding it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Wills

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।