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सहीह मुस्लिम

नंबर 4188

नंबर 4188किताब 24, नंबर 26अरबी नंबरिंग 1625.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ، عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَيُّمَا رَجُلٍ أُعْمِرَ عُمْرَى لَهُ وَلِعَقِبِهِ فَإِنَّهَا لِلَّذِي أُعْطِيَهَا لاَ تَرْجِعُ إِلَى الَّذِي أَعْطَاهَا لأَنَّهُ أَعْطَى عَطَاءً وَقَعَتْ فِيهِ الْمَوَارِيثُ ‏"‏ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah (Allah be pleased with them) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:"Any man who is given a gift for life, it belongs to him and his heirs. It belongs to the one to whom it is given, and does not go back to the one who gave it, because he has given it in such a way that it is subject to the rules of inheritance

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।