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सहीह मुस्लिम

नंबर 4183

नंबर 4183किताब 24, नंबर 21अरबी नंबरिंग 1623.07
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ أَلَكَ بَنُونَ سِوَاهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَكُلَّهُمْ أَعْطَيْتَ مِثْلَ هَذَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَلاَ أَشْهَدُ عَلَى جَوْرٍ ‏"‏ ‏.‏
Nu'man b. Bashir, reported that Allah's Messenger (ﷺ) had said:Have you, besides him, other sons? He said: Yes. Thereupon he (the Holy Prophet) said: Have you given gifts to all of them like this (as you have given to Nu'man)? He said: No. Thereupon he (the Holy Prophet) said: I cannot bear witness to an injustice

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।