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सहीह मुस्लिम

नंबर 4170

नंबर 4170किताब 24, नंबर 8अरबी नंबरिंग 1622.01
حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى الرَّازِيُّ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالاَ أَخْبَرَنَا عِيسَى، بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ، مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَثَلُ الَّذِي يَرْجِعُ فِي صَدَقَتِهِ كَمَثَلِ الْكَلْبِ يَقِيءُ ثُمَّ يَعُودُ فِي قَيْئِهِ فَيَأْكُلُهُ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Abbas (Allah be pleased with them) reported Allah's Apostle (ﷺ) having said this:He who gets back his charity is like a dog which vomits, and then returns to that and eats it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।