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सहीह मुस्लिम

नंबर 4154

नंबर 4154किताब 23, नंबर 15अरबी नंबरिंग 1618.03
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، أَخْبَرَنَا عِيسَى، - وَهُوَ ابْنُ يُونُسَ - حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْبَرَاءِ، أَنَّ آخِرَ، سُورَةٍ أُنْزِلَتْ تَامَّةً سُورَةُ التَّوْبَةِ وَأَنَّ آخِرَ آيَةٍ أُنْزِلَتْ آيَةُ الْكَلاَلَةِ ‏.‏
Abu Ishaq said that he heard al-Bara' b. 'Azib (Allah be pleased with him) say:The last complete sura revealed (in the Holy Qur'an) is Sura Tauba (i e. al-Bara'at, ix.), and the last verse revealed is that pertaining to Kalala

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of the Rules of Inheritance

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।