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सहीह मुस्लिम

नंबर 4122

नंबर 4122किताब 22, नंबर 161अरबी नंबरिंग 1605.01
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ، - يَعْنِي ابْنَ بِلاَلٍ - عَنْ يَحْيَى، - وَهُوَ ابْنُ سَعِيدٍ - قَالَ كَانَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ يُحَدِّثُ أَنَّ مَعْمَرًا، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنِ احْتَكَرَ فَهُوَ خَاطِئٌ ‏"‏ ‏.‏ فَقِيلَ لِسَعِيدٍ فَإِنَّكَ تَحْتَكِرُ قَالَ سَعِيدٌ إِنَّ مَعْمَرًا الَّذِي كَانَ يُحَدِّثُ هَذَا الْحَدِيثَ كَانَ يَحْتَكِرُ ‏.‏
Ma`mar (Allah be pleased with him) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who hoards is a sinner. It was said to Sa`id (b. al-Musayyib): You also hoard. Sa`id said: Ma`mar who narrated this hadith also hoarded

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।