सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4097

नंबर 4097किताब 22, नंबर 136अरबी नंबरिंग 1599.04
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ اللَّيْثِ بْنِ سَعْدٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ جَدِّي، حَدَّثَنِي خَالِدُ، بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي هِلاَلٍ، عَنْ عَوْنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ عَامِرٍ الشَّعْبِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ نُعْمَانَ بْنَ بَشِيرِ بْنِ سَعْدٍ، صَاحِبَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يَخْطُبُ النَّاسَ بِحِمْصَ وَهُوَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ الْحَلاَلُ بَيِّنٌ وَالْحَرَامُ بَيِّنٌ ‏"‏ ‏.‏ فَذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ زَكَرِيَّاءَ عَنِ الشَّعْبِيِّ إِلَى قَوْلِهِ ‏"‏ يُوشِكُ أَنْ يَقَعَ فِيهِ ‏"‏ ‏.‏
Nu'man b. Bashir b. Sa'd, a Companion of Allah's Messenger (ﷺ) was heard delivering a sermon at Hims and was saying:I heard Allah's Messenger (way peace be upon him) as saying: The lawful is evident and the unlawful is evident, the rest of the hadith is the same as related by Zakariya

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।