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सहीह मुस्लिम

नंबर 4092

नंबर 4092किताब 22, नंबर 131अरबी नंबरिंग 1597
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، - وَاللَّفْظُ لِعُثْمَانَ - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، عُثْمَانُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مُغِيرَةَ، قَالَ سَأَلَ شِبَاكٌ إِبْرَاهِيمَ فَحَدَّثَنَا عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ لَعَنَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم آكِلَ الرِّبَا وَمُؤْكِلَهُ ‏.‏ قَالَ قُلْتُ وَكَاتِبَهُ وَشَاهِدَيْهِ قَالَ إِنَّمَا نُحَدِّثُ بِمَا سَمِعْنَا ‏.‏
Abdullah (b. Mas'ud) (Allah be pleased with him) said that Allah's Messenger (ﷺ) cursed the one who accepted interest and the one who paid it I asked about the one who recorded it, and two witnesses to it. He (the narrator) said:We narrate what we have heard

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।