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सहीह मुस्लिम

नंबर 4056

नंबर 4056किताब 22, नंबर 95अरबी नंबरिंग 1584.03
حَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ يَعْنِي ابْنَ حَازِمٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ، قَالَ سَمِعْتُ يَحْيَى بْنَ سَعِيدٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا ابْنُ، أَبِي عَدِيٍّ عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، كُلُّهُمْ عَنْ نَافِعٍ، ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِ اللَّيْثِ عَنْ نَافِعٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، الْخُدْرِيِّ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Abu Sa'id al-Khudri through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।