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सहीह मुस्लिम

नंबर 4049

नंबर 4049किताब 22, नंबर 88अरबी नंबरिंग 1581.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ، بْنِ جَعْفَرٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَامَ الْفَتْحِ ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ - يَعْنِي أَبَا عَاصِمٍ - عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ قَالَ كَتَبَ إِلَىَّ عَطَاءٌ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَامَ الْفَتْحِ بِمِثْلِ حَدِيثِ اللَّيْثِ ‏.‏
Yazid b. Abu Habib reported:'Ata' reported to me that he heard Jabir (b. 'Abdullah) saying it that he had heard that from Allah's Messenger (ﷺ) in the Year of Victory

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।