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सहीह मुस्लिम

नंबर 4042

नंबर 4042किताब 22, नंबर 81अरबी नंबरिंग 1202.03
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، - وَاللَّفْظُ لِعَبْدٍ - قَالاَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ، الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ حَجَمَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَبْدٌ لِبَنِي بَيَاضَةَ فَأَعْطَاهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَجْرَهُ وَكَلَّمَ سَيِّدَهُ فَخَفَّفَ عَنْهُ مِنْ ضَرِيبَتِهِ وَلَوْ كَانَ سُحْتًا لَمْ يُعْطِهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Ibn 'Abbas (Allah be pleased with them) reported:The slave of Banu Bayada cupped Allah's Apostle (ﷺ) and he gave him his wages, and talked to his master and he reduced the charges, and if this earning was unlawful Allah's Apostle (ﷺ) would not have given it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।