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सहीह मुस्लिम

नंबर 4037

नंबर 4037किताब 22, नंबर 76अरबी नंबरिंग 1576.02
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ قَالُوا حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ، خُصَيْفَةَ أَخْبَرَنِي السَّائِبُ بْنُ يَزِيدَ، أَنَّهُ وَفَدَ عَلَيْهِمْ سُفْيَانُ بْنُ أَبِي زُهَيْرٍ الشَّنَئِيُّ فَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Sufyan b. Abu Zuhair al-Shana'i

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।