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सहीह मुस्लिम

नंबर 4032

नंबर 4032किताब 22, नंबर 71अरबी नंबरिंग 1575.03
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ الدَّسْتَوَائِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَمْسَكَ كَلْبًا فَإِنَّهُ يَنْقُصُ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ إِلاَّ كَلْبَ حَرْثٍ أَوْ مَاشِيَةٍ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira (Allah be pleased with him) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who kept a dog would lose out of his deeds equal to one qirat every day. except (one kept) for watching the field or herd

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।