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सहीह मुस्लिम

नंबर 4029

नंबर 4029किताब 22, नंबर 68अरबी नंबरिंग 1574.07
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ الْمُثَنَّى - قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ، بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الْحَكَمِ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ، يُحَدِّثُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنِ اتَّخَذَ كَلْبًا إِلاَّ كَلْبَ زَرْعٍ أَوْ غَنَمٍ أَوْ صَيْدٍ يَنْقُصُ مِنْ أَجْرِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Umar (Allah be pleased with them) narrated Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who kept a dog ther than one meant for watching the fields or herds or hunting would lose one qirat every day out of his reward (with God)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।