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सहीह मुस्लिम

नंबर 4026

नंबर 4026किताब 22, नंबर 65अरबी नंबरिंग 1574.04
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَيَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنْ مُحَمَّدٍ، - وَهُوَ ابْنُ أَبِي حَرْمَلَةَ - عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ، اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ مَنِ اقْتَنَى كَلْبًا إِلاَّ كَلْبَ مَاشِيَةٍ أَوْ كَلْبَ صَيْدٍ نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ ‏"‏ أَوْ كَلْبَ حَرْثٍ ‏"‏ ‏.‏
Salim b. 'Abdullah reported on the authority of his father that Allah's Messenger (ﷺ) said:He who kept a dog other than one meant for watching the herd or for hunting would lose every day two qirat of his good deeds. 'Abdullah and Abu Huraira also said: Or dog meant for watching the field

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।