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सहीह मुस्लिम

नंबर 4022

नंबर 4022किताब 22, नंबर 61अरबी नंबरिंग 1573.02
وَحَدَّثَنِيهِ يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ، حَاتِمٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا النَّضْرُ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، كُلُّهُمْ عَنْ شُعْبَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ حَاتِمٍ فِي حَدِيثِهِ عَنْ يَحْيَى، وَرَخَّصَ، فِي كَلْبِ الْغَنَمِ وَالصَّيْدِ وَالزَّرْعِ ‏.‏
In the hadith transmitted on the authority of Yahya, he (the Holy Prophet) permitted the keeping of dogs for (the protection of) herds, for hunting and (the protection of) cultivated land

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।