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सहीह मुस्लिम

नंबर 4014

नंबर 4014किताब 22, नंबर 53अरबी नंबरिंग 1568.04
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى، بْنِ أَبِي كَثِيرٍ حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ، حَدَّثَنَا رَافِعُ بْنُ خَدِيجٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ ‏.‏
A hadith like this has been narrated on the authority of Rafi' b. Khadij through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।