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सहीह मुस्लिम

नंबर 3998

नंबर 3998किताब 22, नंबर 37अरबी नंबरिंग 1562.01
حَدَّثَنَا مَنْصُورُ بْنُ أَبِي مُزَاحِمٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرِ بْنِ زِيَادٍ، - قَالَ مَنْصُورٌ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، وَقَالَ ابْنُ جَعْفَرٍ، أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ، وَهُوَ ابْنُ سَعْدٍ عَنِ ابْنِ، شِهَابٍ عَنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ كَانَ رَجُلٌ يُدَايِنُ النَّاسَ فَكَانَ يَقُولُ لِفَتَاهُ إِذَا أَتَيْتَ مُعْسِرًا فَتَجَاوَزْ عَنْهُ لَعَلَّ اللَّهَ يَتَجَاوَزُ عَنَّا ‏.‏ فَلَقِيَ اللَّهَ فَتَجَاوَزَ عَنْهُ ‏"‏ ‏.‏
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "एक व्यक्ति लोगों को क़र्ज़ देता और अपने सेवकों से कहा करता कि जब किसी ऋण चुकाने में असमर्थ व्यक्ति के पास जाओ तो उसके क़र्ज़ की अनदेखी करो। हो सकता है कि अल्लाह हमारे गुनाहों की अनदेखी करे। तो जब वह मरने के बाद, अल्लाह से मिला तो अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।