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सहीह मुस्लिम

नंबर 3991

नंबर 3991किताब 22, नंबर 30अरबी नंबरिंग 1559.05
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، أَيْضًا حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي كِلاَهُمَا، عَنْ قَتَادَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ وَقَالاَ ‏ "‏ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ مِنَ الْغُرَمَاءِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Qatada with the same chain of transmitters (but with a change of these words):" He is more entitled to get it than any other creditor

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।