सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 3980

नंबर 3980किताब 22, नंबर 19अरबी नंबरिंग 1554.03
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْحَكَمِ، وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ دِينَارٍ، وَعَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ الْعَلاَءِ، - وَاللَّفْظُ لِبِشْرٍ - قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ حُمَيْدٍ الأَعْرَجِ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ عَتِيقٍ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّوسلم أَمَرَ بِوَضْعِ الْجَوَائِحِ ‏.‏ قَالَ أَبُو إِسْحَاقَ - وَهْوَ صَاحِبُ مُسْلِمٍ - حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ عَنْ سُفْيَانَ بِهَذَا ‏.‏
Jabir (Allah be pleased with him) reported that Allah's Apostle (ﷺ) commanded to make deductions in the payment of that stricken with a Calamity

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।