सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 3902

नंबर 3902किताब 21, नंबर 101अरबी नंबरिंग 1543.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، جَمِيعًا عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَيُّمَا نَخْلٍ اشْتُرِيَ أُصُولُهَا وَقَدْ أُبِّرَتْ فَإِنَّ ثَمَرَهَا لِلَّذِي أَبَّرَهَا إِلاَّ أَنْ يَشْتَرِطَ الَّذِي اشْتَرَاهَا‏"‏ ‏.‏
Nafi reported on the authority of Ibn Umar (Allah be pleased with them) that the Messenger of Allah (ﷺ) said:Whichever tree is bought with its roots, and if it is fecundatedits fruit would belong to one who has grafted it except when the provision is laid down by the buyer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।