قَالَ ابْنُ عُمَرَ وَحَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَخَّصَ فِي بَيْعِ الْعَرَايَا . زَادَ ابْنُ نُمَيْرٍ فِي رِوَايَتِهِ أَنْ تُبَاعَ .
Zaid b. Thabit (Allah be pleased with him) said that Allah's Messenger (ﷺ) gave a concession in case of the sale known as al-araya, there is an addition of the word an tuba'a in the hadith transmitted by Ibn Numair
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।