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सहीह मुस्लिम

नंबर 3859

नंबर 3859किताब 21, नंबर 58अरबी नंबरिंग 1532.02
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْحَارِثِ، يُحَدِّثُ عَنْ حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمِثْلِهِ ‏.‏ قَالَ مُسْلِمُ بْنُ الْحَجَّاجِ وُلِدَ حَكِيمُ بْنُ حِزَامٍ فِي جَوْفِ الْكَعْبَةِ وَعَاشَ مِائَةً وَعِشْرِينَ سَنَةً ‏.‏
A hadith like this has been transmitted on the authority of Hakim b. Hizam (Imam Muslim) said:Hakim b. Hizam was born inside the Ka'ba and lived for one hundred and twenty years

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।