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सहीह मुस्लिम

नंबर 3796

नंबर 3796किताब 20, नंबर 26अरबी नंबरिंग 1509.02
وَحَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ رُشَيْدٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مُطَرِّفٍ أَبِي غَسَّانَ، الْمَدَنِيِّ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنٍ، عَنْ سَعِيدِ ابْنِ مَرْجَانَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ رَقَبَةً أَعْتَقَ اللَّهُ بِكُلِّ عُضْوٍ مِنْهَا عُضْوًا مِنْ أَعْضَائِهِ مِنَ النَّارِ حَتَّى فَرْجَهُ بِفَرْجِهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira (Allah be pleased with him) reported Allah's Messenger (may peace benpon him) as saying:He who emancipates a slave, Allah will set free from Hell every limb (of his body) for every limb of his (slave's) body, even his private parts

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Emancipating Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।