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सहीह मुस्लिम

नंबर 623

नंबर 623किताब 2, नंबर 90अरबी नंबरिंग 272.02
وَحَدَّثَنَاهُ إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، ح وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، ح وَحَدَّثَنَا مِنْجَابُ بْنُ الْحَارِثِ التَّمِيمِيُّ، أَخْبَرَنَا ابْنُ مُسْهِرٍ، كُلُّهُمْ عَنِ الأَعْمَشِ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ بِمَعْنَى حَدِيثِ أَبِي مُعَاوِيَةَ غَيْرَ أَنَّ فِي، حَدِيثِ عِيسَى وَسُفْيَانَ قَالَ فَكَانَ أَصْحَابُ عَبْدِ اللَّهِ يُعْجِبُهُمْ هَذَا الْحَدِيثُ لأَنَّ إِسْلاَمَ جَرِيرٍ كَانَ بَعْدَ نُزُولِ الْمَائِدَةِ ‏.‏
This hadith is narrated on the same authority from A'mash by another chain of transmitters like one transmitted by Abu Mu'awyia. The hadith reported by 'Isa and Sufyan has these words also:" This hadith surprised the friends of Abdullab'" for Jarir had embraced Islam after the revelation of al-Ma'ida

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।