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सहीह मुस्लिम

नंबर 610

नंबर 610किताब 2, नंबर 77अरबी नंबरिंग 265
وَحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ بْنِ خِرَاشٍ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ - حَدَّثَنَا رَوْحٌ، عَنْ سُهَيْلٍ، عَنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا جَلَسَ أَحَدُكُمْ عَلَى حَاجَتِهِ فَلاَ يَسْتَقْبِلِ الْقِبْلَةَ وَلاَ يَسْتَدْبِرْهَا ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira said:When any one amongst you squats for answering the call of nature, he should neither turn his face towards the Qibla nor turn his back towards it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।