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सहीह मुस्लिम

नंबर 594

नंबर 594किताब 2, नंबर 61अरबी नंबरिंग 255.02
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنِ الأَعْمَشِ، كِلاَهُمَا عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَامَ مِنَ اللَّيْلِ ‏.‏ بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَقُولُوا لِيَتَهَجَّدَ ‏.‏
This hadith is reported from Hudaifa by another chain of transmitters. Whenever he (the Holy Prophet) got up in the night, they (the transmitters) have not mentioned the words:for offering Tahajjud prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।