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सहीह मुस्लिम

नंबर 589

नंबर 589किताब 2, नंबर 56अरबी नंबरिंग 252
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَوْلاَ أَنْ أَشُقَّ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ - وَفِي حَدِيثِ زُهَيْرٍ عَلَى أُمَّتِي - لأَمَرْتُهُمْ بِالسِّوَاكِ عِنْدَ كُلِّ صَلاَةٍ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Apostle (ﷺ) said: Were it not that I might over-burden the believers-and in the hadith transmitted by Zuhair" people" -I would have ordered them to use toothstick at every time of prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।