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सहीह मुस्लिम

नंबर 560

नंबर 560किताब 2, नंबर 27अरबी नंबरिंग 237.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، - قَالَ قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، - عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، يَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا اسْتَجْمَرَ أَحَدُكُمْ فَلْيَسْتَجْمِرْ وِتْرًا وَإِذَا تَوَضَّأَ أَحَدُكُمْ فَلْيَجْعَلْ فِي أَنْفِهِ مَاءً ثُمَّ لْيَنْتَثِرْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:When anyone wipes himself with pebbles (after answering the call of nature) he must make use of an odd number and when any one of you performs ablution he must snuff in his nose water and then clean it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।