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सहीह मुस्लिम

नंबर 550

नंबर 550किताब 2, नंबर 17अरबी नंबरिंग 233.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، كُلُّهُمْ عَنْ إِسْمَاعِيلَ، - قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، - أَخْبَرَنِي الْعَلاَءُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ، مَوْلَى الْحُرَقَةِ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الصَّلاَةُ الْخَمْسُ وَالْجُمُعَةُ إِلَى الْجُمُعَةِ كَفَّارَةٌ لِمَا بَيْنَهُنَّ مَا لَمْ تُغْشَ الْكَبَائِرُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: Five prayers and from one Friday prayer to (the next) Friday prayer is an expiation (of the sins committed in between their intervals) if major sins are not committed

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।