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सहीह मुस्लिम

नंबर 3751

नंबर 3751किताब 19, नंबर 9अरबी नंबरिंग 1493.06
وَحَدَّثَنَا أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ - وَاللَّفْظُ لِلْمِسْمَعِيِّ وَابْنِ الْمُثَنَّى - قَالُوا حَدَّثَنَا مُعَاذٌ، - وَهُوَ ابْنُ هِشَامٍ - قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عَزْرَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، قَالَ لَمْ يُفَرِّقِ الْمُصْعَبُ بَيْنَ الْمُتَلاَعِنَيْنِ ‏.‏ قَالَ سَعِيدٌ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ ‏.‏ فَقَالَ فَرَّقَ نَبِيُّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ أَخَوَىْ بَنِي الْعَجْلاَنِ ‏.‏
Sa'id b. Jubair reported that Mus'ab b. Zubair did not effect separation between the Mutala'inain (invokers of curses). Sa'id said:It was mentioned to 'Abdullah b. Umar (Allah be pleased with them) and he said: Allah's Apostle (ﷺ) effected separation between the two members of Banu al-'Ajlan

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book of Invoking Curses

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।