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सहीह मुस्लिम

नंबर 3740

नंबर 3740किताब 18, नंबर 85अरबी नंबरिंग 938.03
وَحَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ، حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ حَفْصَةَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُحِدُّ امْرَأَةٌ عَلَى مَيِّتٍ فَوْقَ ثَلاَثٍ إِلاَّ عَلَى زَوْجٍ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا وَلاَ تَلْبَسُ ثَوْبًا مَصْبُوغًا إِلاَّ ثَوْبَ عَصْبٍ وَلاَ تَكْتَحِلُ وَلاَ تَمَسُّ طِيبًا إِلاَّ إِذَا طَهُرَتْ نُبْذَةً مِنْ قُسْطٍ أَوْ أَظْفَارٍ ‏"‏ ‏.‏
उम्मे अतिय्या (रज़ियल्लाहु अनहा) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करती हैं कि कोई स्त्री मृतक पर तीन दिनों से अधिक सोग नहीं मनाएगी। हाँ, अपने पति पर चार महीने दस दिन सोग मनाएगी। वह अस्ब नामी यमनी वस्त्र छोड़कर कोई रंगा हुआ कपड़ा नहीं पहनेगी तथा सुरमा एवं ख़ुशबू नहीं लगाएगी। हाँ, जब पाक हो जाए तो कु़स्त या अज़फ़ार आदि खुशबूएँ लगा सकती है।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 18 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।