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सहीह मुस्लिम

नंबर 3658

नंबर 3658किताब 18, नंबर 7अरबी नंबरिंग 1471.07
وَحَدَّثَنِيهِ إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ رَبِّهِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنِي الزُّبَيْدِيُّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ قَالَ ابْنُ عُمَرَ فَرَاجَعْتُهَا وَحَسَبْتُ لَهَا التَّطْلِيقَةَ الَّتِي طَلَّقْتُهَا ‏.‏
A hadith like this was reported on the authority of Zuhri with the same chain of narrators. Ibn Umar (Allah be pleased with them), however, said:I took her back, and counted this pronouncement of divorce (as valid) with which I divorced her

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।