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सहीह मुस्लिम

नंबर 3655

नंबर 3655किताब 18, नंबर 4अरबी नंबरिंग 1471.04
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ الْمُثَنَّى، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَهُ وَلَمْ يَذْكُرْ قَوْلَ عُبَيْدِ اللَّهِ لِنَافِعٍ ‏.‏ قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى فِي رِوَايَتِهِ فَلْيَرْجِعْهَا ‏.‏ وَقَالَ أَبُو بَكْرٍ فَلْيُرَاجِعْهَا ‏.‏
A hadith like this has been narrated on the authority of 'Ubaidullah, but he made no mention of the words of Ubaidullah that he said to Nafi

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।