आइशा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अबू हुज़ैफ़ा के 'मौला' (अर्थात उनके मुक्त किए हुए दास) सालिम अबू हुज़ैफ़ा तथा उनके परिवार के साथ उन्हीं के घर में रहते थे। अतः, अबू ह़ुज़ैफ़ा की पत्नी (जो सुहैल की बेटी थीं) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आईं और कहने लगींः सालिम अब व्यस्क हो चुका है और वह बातें समझने लगा है, जो व्यस्क लोग समझते हैं तथा उसका हमारे पास आना-जाना होता है और मुझे लगता है अबू हुज़ैफ़ा इस बात को नापसंद करते हैं। तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे फ़रमायाः "उसे दूध पिला दो, तुम उसपर हराम हो जाओगी और अबू हुज़ैफ़ा के दिल में जो बात है, वह ख़त्म हो जाएगी।" वह (बाद में) अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास लौटकर आईं और कहने लगींः मैंने उसे दूध पिला दिया है और अबू हुज़ैफ़ा के दिल में जो नापसंदीदगी थी, वह दूर हो गई है।
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।