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सहीह मुस्लिम

नंबर 3584

नंबर 3584किताब 17, नंबर 17अरबी नंबरिंग 1447.02
وَحَدَّثَنَاهُ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، وَهُوَ الْقَطَّانُ ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، بْنِ مِهْرَانَ الْقُطَعِيُّ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ، جَمِيعًا عَنْ شُعْبَةَ، ح وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي عَرُوبَةَ، كِلاَهُمَا عَنْ قَتَادَةَ، بِإِسْنَادِ هَمَّامٍ سَوَاءً غَيْرَ أَنَّ حَدِيثَ شُعْبَةَ انْتَهَى عِنْدَ قَوْلِهِ ‏"‏ ابْنَةُ أَخِي مِنَ الرَّضَاعَةِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ سَعِيدٍ ‏"‏ وَإِنَّهُ يَحْرُمُ مِنَ الرَّضَاعَةِ مَا يَحْرُمُ مِنَ النَّسَبِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ بِشْرِ بْنِ عُمَرَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ زَيْدٍ ‏.‏
A hadith like this is narrated on the authority of Hammam, Sa'id, Bishr b 'Umar, but with a small variation of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · The Book of Suckling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।