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सहीह मुस्लिम

नंबर 3566

नंबर 3566किताब 16, नंबर 168अरबी नंबरिंग 1442.03
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ نَوْفَلٍ الْقُرَشِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنْ جُدَامَةَ بِنْتِ وَهْبٍ، الأَسَدِيَّةِ أَنَّهَا قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فَذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ سَعِيدِ بْنِ أَبِي أَيُّوبَ فِي الْعَزْلِ وَالْغِيلَةِ ‏.‏ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ الْغِيَالِ ‏"‏ ‏.‏
Judama bint Wahb al-Asadiyya (Allah be pleased with her) reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) saying this. The rest of the hadith is the same concerning 'azl and ghila (cohabitating with a suckling woman), but with a slight variation of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।