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सहीह मुस्लिम

नंबर 3548

नंबर 3548किताब 16, नंबर 150अरबी नंबरिंग 1438.05
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى، بْنُ حَبِيبٍ حَدَّثَنَا خَالِدٌ يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، بْنُ مَهْدِيٍّ وَبَهْزٌ قَالُوا جَمِيعًا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَنَسِ بْنِ سِيرِينَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِهِمْ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ فِي الْعَزْلِ ‏ "‏ لاَ عَلَيْكُمْ أَنْ لاَ تَفْعَلُوا ذَاكُمْ فَإِنَّمَا هُوَ الْقَدَرُ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ بَهْزٍ قَالَ شُعْبَةُ قُلْتُ لَهُ سَمِعْتَهُ مِنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَ نَعَمْ ‏.‏
This hadith is reported on the authority of Abu Sa'id with the same chain of transmitters but with a slight variation (of words)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।