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सहीह मुस्लिम

नंबर 3518

नंबर 3518किताब 16, नंबर 121अरबी नंबरिंग 1430.01
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ، اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي قَالاَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِذَا دُعِيَ أَحَدُكُمْ إِلَى طَعَامٍ فَلْيُجِبْ فَإِنْ شَاءَ طَعِمَ وَإِنْ شَاءَ تَرَكَ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرِ ابْنُ الْمُثَنَّى ‏"‏ إِلَى طَعَامٍ ‏"‏ ‏.‏
Jabir (Allah be pleased with him) reported that Allah's Messenger (may peace he upon him) said:When any one of you is invited to a feast, he should accept it. He may eat if he likes, or he may abandon (eating) if he likes. Ibn Mathanni did not make mention of the word" feast

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।