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सहीह मुस्लिम

नंबर 3469

नंबर 3469किताब 16, नंबर 71अरबी नंबरिंग 1416.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، وَأَبُو أُسَامَةَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الشِّغَارِ ‏.‏ زَادَ ابْنُ نُمَيْرٍ وَالشِّغَارُ أَنْ يَقُولَ الرَّجُلُ لِلرَّجُلِ زَوِّجْنِي ابْنَتَكَ وَأُزَوِّجُكَ ابْنَتِي أَوْ زَوِّجْنِي أُخْتَكَ وَأُزَوِّجُكَ أُخْتِي ‏.‏
Abu Huraira (Allah be pleased with him) reported that Allah's Messenger (ﷺ) prohibited Shighar. Ibn Numair added:Shighar means that a person should say to the other person: Give me the hand of your daughter in marriage and I will (in return) marry my daughter to you; or merry me your sister, and I will marry my sister to you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।