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सहीह मुस्लिम

नंबर 3464

नंबर 3464किताब 16, नंबर 66अरबी नंबरिंग 1414
وَحَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنِ اللَّيْثِ، وَغَيْرِهِ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ، أَبِي حَبِيبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ شُمَاسَةَ، أَنَّهُ سَمِعَ عُقْبَةَ بْنَ عَامِرٍ، عَلَى الْمِنْبَرِ يَقُولُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْمُؤْمِنُ أَخُو الْمُؤْمِنِ فَلاَ يَحِلُّ لِلْمُؤْمِنِ أَنْ يَبْتَاعَ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ وَلاَ يَخْطُبَ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ حَتَّى يَذَرَ ‏"‏ ‏.‏
Uqba b. 'Amir said on the pulpit that Allah's Messenger (ﷺ) said:A believer is the brother of a believer, so it is not lawful for a believer to outbid his brother, and he should not propose an engagement when his brother has thus proposed until he gives it up

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।