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सहीह मुस्लिम

नंबर 3451

नंबर 3451किताब 16, नंबर 54अरबी नंबरिंग 1410.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ وَإِسْحَاقُ الْحَنْظَلِيُّ جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، - قَالَ ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، - عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي الشَّعْثَاءِ، أَنَّ ابْنَ، عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم تَزَوَّجَ مَيْمُونَةَ وَهُوَ مُحْرِمٌ ‏.‏ زَادَ ابْنُ نُمَيْرٍ فَحَدَّثْتُ بِهِ الزُّهْرِيَّ فَقَالَ أَخْبَرَنِي يَزِيدُ بْنُ الأَصَمِّ أَنَّهُ نَكَحَهَا وَهُوَ حَلاَلٌ ‏.‏
Ibn Abbas (Allah be pleased with them) reported that Allah's Apostle (ﷺ) married Maimuna in the state of Ihram. Ibn Numair made this addition:" I narrated it to Zuhri and he said: Yazid b. al-Asamm (Allah be pleased with him) told me that he (the Holy Prophet) married her when he was not a muhrim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।