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सहीह मुस्लिम

नंबर 3449

नंबर 3449किताब 16, नंबर 52अरबी नंबरिंग 1409.04
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ، عُيَيْنَةَ - قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، - عَنْ أَيُّوبَ بْنِ مُوسَى، عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ، عَنْ أَبَانِ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ عُثْمَانَ، يَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْمُحْرِمُ لاَ يَنْكِحُ وَلاَ يَخْطُبُ ‏"‏ ‏.‏
Uthman (b. 'Affan) reported it directly from Allah's Apostle (ﷺ) that he said:A Muhrim should neithermarry (in that state) nor make the proposal of marriage

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।