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सहीह मुस्लिम

नंबर 3439

नंबर 3439किताब 16, नंबर 42अरबी नंबरिंग 1408.04
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَخْبَرَنِي قَبِيصَةُ بْنُ ذُؤَيْبٍ الْكَعْبِيُّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَجْمَعَ الرَّجُلُ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَعَمَّتِهَا وَبَيْنَ الْمَرْأَةِ وَخَالَتِهَا ‏.‏ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَنُرَى خَالَةَ أَبِيهَا وَعَمَّةَ أَبِيهَا بِتِلْكَ الْمَنْزِلَةِ ‏.‏
Abu Huraira (Allah be pleased with him) reported that Allah's Messenger (ﷺ) forbade a person to combine in marriage a womanarid her father's sister, and a woman and her mother's sister. Ibn Shihab said:So we regarded the paternal aunt of her (wife's) father and the maternal aunt of her (wife's) father at the same level

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।