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सहीह मुस्लिम

नंबर 3430

नंबर 3430किताब 16, नंबर 33अरबी नंबरिंग 1406.12
وَحَدَّثَنِي سَلَمَةَ بْنُ شَبِيبٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَعْيَنَ، حَدَّثَنَا مَعْقِلٌ، عَنِ ابْنِ أَبِي عَبْلَةَ، عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، قَالَ حَدَّثَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سَبْرَةَ الْجُهَنِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنِ الْمُتْعَةِ وَقَالَ ‏ "‏ أَلاَ إِنَّهَا حَرَامٌ مِنْ يَوْمِكُمْ هَذَا إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَمَنْ كَانَ أَعْطَى شَيْئًا فَلاَ يَأْخُذْهُ ‏"‏ ‏.‏
Sabra al-Juhanni reported on the authority of his father:Allah's Messenger (ﷺ) prohibited the contracting of temporary marriage and said: Behold, it is forbidden from this very day of yours to the Day of Resurrection, and he who has given something (as a dower) should not take it back

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।