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सहीह मुस्लिम

नंबर 3414

नंबर 3414किताब 16, नंबर 17अरबी नंबरिंग 1405.02
وَحَدَّثَنِي أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ الْعَيْشِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ - حَدَّثَنَا رَوْحٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْقَاسِمِ - عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ، وَجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَتَانَا فَأَذِنَ لَنَا فِي الْمُتْعَةِ ‏.‏
Salama b. al. Akwa' and Jabir b. Abdullah reported:Allah's Messenger (ﷺ) came to us and permitted us to contract temporary marriage

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।