सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 3411

नंबर 3411किताब 16, नंबर 14अरबी नंबरिंग 1404.02
وَحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ وَقَالَ ثُمَّ قَرَأَ عَلَيْنَا هَذِهِ الآيَةَ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ قَرَأَ عَبْدُ اللَّهِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Jarir with the same chain of transmitters and he also recited this (above-mentioned verse) to us, but he did not say that 'Abdullah recited it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।